Wednesday, 15 April 2015

The seeds of deeds

If the land be barren,
Deeds thy, sow with love
Shall grow!
So sow, all the seeds,
With love,
Harvest, shall show,
In the times to come
Times to come,
To tell, if
They were the seeds of love,
Shall show their face
To the winds,
beating aloud on drums,
Be it love,
All barren land shall,
Grow, what you sow,
With love!

#SangeetaSuneja

Tuesday, 14 April 2015

उसका क्या दोष

धूप का काम सुखाना,
हरी पाती नींम की हो या पोदीने की,
छाले हो या नदीया,
सूरज साझ त़क 
मेरे शहर का कोना कोना अपनी छानता है, सूखाया करता है,

मैं आँखे बंद रखूं तो भला इसमे, उसका क्या दोष?

#संगीतासुनेजा

Monday, 13 April 2015

विजयता


सदीओं

की सादगी,

उनके 

बीत जाने मे है,

निस्तब्ध.

नियती.

आती

और

जाती

समय की लाश

बन कर जल रहो तो विजयता

अन्यथा,

लड़ता हुआ, हारा सिपाही.

#संगीतासुनेजा

पीतल का कल

समय

का एक

लौटा

भरा था

पीतल का
कल,

और

फिर

प्यासा,

मुह खोले,

आसमान 

से चाँदी

की चमक

उधार

माँगता है/



#संगीतासुनेजा

भूली कोई वो बात है

भूली कोई वो बात है

कहती थी कुछ 
करती कुछ,

इक रात की पुरानी बात है,
सोने को कहती
और सपने बुनती,

जब दिन होती तब कब  
यह रात है. 

बैसाखी

मिट्टी की ज़ुबा कुछ और ही है,
खामोश भी है,
सोंधी शबनम से नम भी है,
पत्तो की थिरकन पर,
हवा का हल्का शोर भी है,
नई धुल्हन सी गहनो से लदी,
गैहू की सुनहरी बालीआ, कटनेको हैं,
बैसाख, आने को है, सूरज सुलगने को है,
मिट्टी की, दबी ज़ूबा मे,
दिल का दलदल सूखने को है.
बैसाखी है, मगर कुदाल और किसान की आँख
नम क्यूँ है?

#संगीतासुनेजा

Sunday, 12 April 2015

Lullaby

Lullaby

It has been a long lullaby,
The Life forcefully sings,
In a brittle glass house,
The seeking soul sleeps,
The inert mind dreams.

I wait for my master
To take me to the grand, gala eve,
With the piercing beam,
Breaking, my stream.

The Sun has risen,
High,
It has been an everlasting
lullaby,
The eyes asking, to open, to,
The horizons, peach and cream.

#SangeetaSuneja